“ घुघट ”
चेहरा न दिखता मुझे तेरा
तू घुघट मे है सामने मेरे
कैसे बताऊ मै तू परी की सहजादी है
या
तू गुलाब की कली है |
दिल मचल रहा है
मेरा
तेरा चेहरा देखने
के लिये
घुघट खोल दे जल्द तू
जरा दीदार कर लू मै | |दिल मचल ....|
मुझे मालुम नही तू कौन है
कहाँ से आयी
है
लगता है मुझे तू
मुहब्बत इजहार
करने आयी है | मुझे मालुम ..|
इरादा तेरा बहुत दुरुस्त है
मस्ती छा गयी दिल मे मेरे
जल्द गले से लग जा
जन्नत बना दे जिन्दगी मेरी | इरादा
तेरा ..|
ऐम०ऐस० लाल (नरेश )
No comments:
Post a Comment