“ अनजानी तस्बीर “(क्ल्पन्ना )
जाने
कौन बसी है
आँखों मे मेरी
निगाह जहाँ पड़ती मेरी
दिखती तस्बीर उसकी | जाने कौन..|
आवाज़ बहुत देता उसे
जबाब नही देती वह
पलक जब बंद करता मै
दिखती
तस्बीर उसकी |आवाज़ बहुत ..|
तमन्ना है वह पास आये मेरे
अश्यांना न मालूम है उसका
जाने क्यों याद बहुत आती वह
बसी आँखों मे है तस्बीर
जिसकी |तमन्ना है ..|
मांगता खुदा से बस मै
सलामत रखे उमर भर उसको
करामत बनकर वह उभरे
वाह वाह दुनिया
मे जाये |मांगता खुदा ..|
ऐम० एस ० लाल
(नरेश)
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