“दूरी “
तुम दूर हो इतनी
नाप नही सकता
फिर भी पास लगती
बता
नही सकता | तुम दूर ..|
धडकन होती तुम्हे
अहशास
मुझको होता
देखता धडकन तुम्हारी
बता नही मे सकता |धडकन होती ....|
रात आती
रोज
चांदनी संग लाती
सारी
रात निहारता उसे
तुमको
समझ कर |रात आती ..|
पन्ना ..२...
“२”
समझता
दिल को बहुत
बावला समझता ही नही
बिन तुम घर रेगिस्तान लगता
घर मे अँधेरा सारा है |समझता
दिल ...|
तुही ही जन्नत है मेरी
तू ही जिन्दगी है मेरी
तेरे आंचल से दूर
जिन्दगी दोजक लगती |
खुदा
माफ़ कर देना उसे
अगर वह मेरी फरियाद न सुने
उसे
जन्नत दे देना
मुझे दोजक
कबूल है |खुदा माफ़ ..|
मुन्ना लाल वर्मा