चाँद
होड़ कर धानी दुपटा निकली वह रात मे ,
चाँद भी शरमा गया उस चांदनी रात मे
कहने लगा चाँद बदलो की आड़ मे
मेरे से सुंदर है वह इस चांदनी रात मे |
मन करता कुछ कुछ करता इस सुनेरी रात मे
प्रसन्ता बरस गयी छा गयी वह इस रात मे
सुन्दरता कम नही है उसकी इस रात मे
दिल मचलता सब का मस्ती भरी इस रात मे |
तारे भी झूम रहे खुसी मे इस रात मे
पपीया आवाज़ करता पीऊ पीऊ करता इस रात मे
मोरनी नाच करती मस्त होकर तारो भरी रात मे
चाँद सरमा रहा है बदलो की आड़ मै |
नरेश