“ सुरमई आंखे “
तेरी सुरमई आंखे मेरी आँखों मे समा गयी
तू
ही दिखती है मुझे और कोइ नही
मोहब्बत करने का तेरा इरादा जान
गया था
खुसरू बाग
मे पहली हशीन मुलाकात मे | तेरी सुरमई
..|
देखकर पहली बार तुझे कुछ कुछ होने लगा
नीद रूठ गयी मेरी नसा मोहब्बत का आने
लगा
पैर
डगमगाने लगे होश जाने लगा
तेरी तसबीर
का सैलाब दिल मे बहने लगा |देखकर
पहली ..|
कदम गिन गिन कर तू जब रखती
कमर बलखा
जाती है तेरी
अच्छा
इतना लगता है मुझे
रवनक चारो
तरफ छा जाती है |
तू बाहों मे जल्द आ जा अब मेरे
जीना मुश्कल हो गया तेरे बिना
सुरमई आँखों का जादू तेरा
लग गया
है बहुत गहरा | तू बाहों.. |
ऐम० एस ० लाल (नरेश)
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