सैनिक –समाचार (प्रथम )
तेरा रूठना भी सही है
तेरा दूर
हो जाना भी सही है
तेरी जुदाई से मुझे मर जाना भी सही है
यू ही
दुनिया से चला जाना न सही है | तेरा रूठना..|
तू समझ न पायी
मुझे ये भी सही है
देश भक्ती के नशा मे चूर तेरा ख्याल न किया
लद्दाख की बर्फिली पहाड़ो पर याद पल पल किया
वतन की सेवा मै
अपनो को भूल गया
| तू समझ..|
मोहब्बत का राज
मै न समझ आया ये भी सही है
अलबिदा दुनिया को कहा ये भी सही नही है
वतन- सेवा मे कश्मीर की सरहद
पर पडा ये भी सही है
पाक को मिटाने की
ठानी है ये भी सही है | मोहब्बत ..का |
ऐम० एस लाल (नरेश)
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