विरहा
काली काली बदरिया छाई
नीद रूठी
पपीया सताये
मन नही लगत एक पल मोरा
उलझन मन
मे छाई| काली काली..|
सेजरिया सूनी सूनी है
मोरी
बलमा की धुन सब और छाई
काली बदरिया रीम झीम बरसे
बलमा
की याद खूब आयी | सेजरिया सूनी सूनी..|
चार वर्स बीत गये सादी रचाये
सईया सटा व्यापार मे दिन बिताते
योमन ढल गये अरमान मीट गये
बलमा को शुध हमारी न आयी |बलमा
को
हनी-मून की बारी अब तक न आयी
बिदाई जवानी
की बारी आयी
बालक बिना गोद
है सूनी मेरी
बलमा को शर्म न अभी तक
आयी | बलमा को शर्म ..
नरेश (ऐम०ऐस०लाल वकील)
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