“ मुहब्बत और जीवन “
मुहब्बत
करना जीवन की एक कला है
अक्सर मुहब्बत का जन्तु मानव
मे होता है
अगर आशीक निभा दे जन्नत मिलता है
नही तो ये मुहब्बत
की सज्जा है | मुहब्बत करना ..|
तितली के संग संग
भवरा रहता है
फूलो की
खुसबू से दोनों जीते है
कलिओ का
रस पीकर जीते है
आलीशान मुह्ब्बत
की जिन्दगी जीता है | मुहब्बत करना ..|
नैनो से नैना लड़ाकर प्रमिका के पास आते कुवारे
मुहब्बत का जाल
बिछाते कुवारे
रास रचाते कुछ वक्त निभाते
कुवारे
रस चूसकर दूर भाग
जाते कुवारे | मुहब्बत करना ..|
पन्ना..२..
“ २”
जवानी गजब है जिन्दगी
गजब है
समझना इनको न
सरल है
नीईया किनारे लाना कठीन है
जाने जो इसको
वही इन्शा है | जवानी गजब ...|
मुहब्बत का मकसत न जाने कुवारे
नाटक दिखाते प्रेमिका को कुवारे
मझदार मे नईया
छोड़ जाते कुवारे
तडफतै तडफतै दुनिया छोड़ जाते कुवारे |
मुह्ब्बत का ..|
डॉ एम ० एस ० लाल
No comments:
Post a Comment