“ समुन्द्र की लहरे “
समुन्द्र की लहरे कहती
समुन्द्र दरिया दिल वाला है
अरे इंशा जरा दरिया दिल बनकर
मोहब्बत का लुफ्त ले कर देखो |
लहरे
मस्त होकर झूमती
उछलती मस्ती मे आगे बहती
अपने आशिक को खोजती खोजती
बहुत
दूर चली जाती |
न कभी थकती लहरे
न
हिम्मत हारती
यार की
खोज मे
चोट पथरो की खाती |
मुह्ब्ब्त गजब की चीज होती है
समझना बहुत मुस्किल है
हजारो हीर –राँझा
बन कर समझते है
लुटाकर
जिन्दगी अपनी अलविदा
कह जाते है
डॉ. एम ० एस ० लाल (नरेश)
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