“ पंछी “
हम चन्द दिनों के पंछी है,
दुनीया मै आये कुछ समय के
लिए,
जाने का हमे
कुछ पता ही नही है ,
यहाँ से हमे कब जाना है /..हम../
पाक और भारत
कोई दूजा है नहीं,
दोनों ही खुदा के बन्दे है ,
अपना अपना
कश्मीर बताकर तुम दोनों
,
अपनों की जान
क्यों लेते हो /..पाक../
चारो धाम की पूजा का मतलब
है क्या .
हज़ की यात्रा का मतलब न जानते हो तुम,
भोले नाथ भी
जो कहते- हमे प्रेम से
रहने को,
खुदा भी वही
कहते है- तुम मोहबत के
साथ रहो /..चारो धाम../
नेताओ की चाल सतरंज की होती है
इसमे कोई शक
है ही नहीं
देश- भक्ती का पाठ पढ़ाकर
हमको,
अपना उल्लू देश मे शीधा करते है //....नेताओ की../
समाँस्या बातो और शान्ती से हल हो सकती है
गोला बारूद दागने से नहीं होती है,
युद्ध करने का
ढंग बहुत पुराना है,
भाई-चारा का
ढंग सब से प्यारा है /...समास्या ../
ऍम.एस. लाल (नरेश )
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