Saturday, 19 August 2017

पन्छी




                                                       
            पंछी 


 हम       चन्द दिनों  के पंछी   है,
दुनीया मै आये कुछ  समय  के लिए,
जाने का हमे कुछ पता ही नही  है ,
यहाँ से  हमे      कब        जाना है /..हम../


पाक और भारत कोई दूजा है नहीं,
दोनों    ही     खुदा   के   बन्दे है ,
अपना अपना कश्मीर बताकर तुम दोनों ,
अपनों    की     जान क्यों लेते हो    /..पाक../


चारो धाम की पूजा का मतलब है क्या .
हज़ की यात्रा का मतलब न जानते हो तुम,
भोले नाथ भी जो कहते- हमे प्रेम से रहने को,
खुदा भी वही कहते है- तुम मोहबत के साथ रहो /..चारो धाम../


नेताओ की चाल सतरंज की होती है
इसमे    कोई     शक    है ही नहीं
देश- भक्ती का पाठ पढ़ाकर हमको,
अपना उल्लू देश मे शीधा करते है //....नेताओ की../


समाँस्या बातो और शान्ती से हल हो सकती है
गोला    बारूद    दागने   से    नहीं होती है,
युद्ध     करने    का    ढंग    बहुत पुराना है,
भाई-चारा का ढंग सब  से   प्यारा है   /...समास्या ../


           ऍम.एस. लाल (नरेश  )







           

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