“ महानगर “मुम्बई
महा नगर की शोभा निराली
व्यस्त रहते सारे
नर नारी
चाव से खाऐ पाँव भाजी
जोर से
कहे आमची मुम्बई प्यारी |
लोकल रेल का ढका मुका
करता है मालिश
बहुत अच्छा
हर बीमारी से जन जन को बचाऐ
शीघ्र हर
जगह पहुचाये |
फिल्म नगरिया
है बहुत प्यारी
फिल्म बनाये
बहुत प्यारी प्यारी
कलाकार ह्साये
बारी बरी
मस्ती मे
रहते सारे नर नारी |
धंधे मे लगे
रहते नर नारी
इर्षा नफरत न किसी के मन मे
दया धर्म
है हर मन मे
मुम्बईकर नाम दिया
इन्हे स्व० बाल्य ठाकरे सर ने |
मुम्बा माता की महमीमा है व्यापक
भूखा प्यासा न रहता कोई जन
आपदा आती
जल्द भाग जाती
पुन; मुम्बई
नगरिया मे न आती |
महा नगर पालिका मुम्बई का ढीला
बरीस मे
इनका काम बहुत ढीला
अधिकारी सारे
है बहुत ढीले
यता यात का साधन
हो जाता ढीला |
नगर - पालिका मुम्बई के मुख्य इन्जीनियर
अनोखे
प्रोजेक्ट को
समय पर न पूरा करते
पब्लिक को बहुत सताते
दस साल से
अधीक तक मढ –वेर्सवा का पुल नही
बनाते |
एम ० एस ० वकील
No comments:
Post a Comment