चान्दनी
होड़कर धानी डूपट्टा निकली वह रात मे
चाँद भी सरमा
गया चांदनी रात मे
छिप गया
वह बदलो की आड़ मे
कहा तू
सुंदर है इस चांदनी रात मे |
किस देश से
आयी है सुन्दरी
क्या आयी है परिओ के देश से
या सज
धज कर आयी है
तू अपनी ससुराल
से |
देखती क्या
घुर कर
हर तरफ
खोजती क्या है तू
तारो की सुहानी बरात
मे
हसते २ तारो ने कहा आयी है हमारी बरात मे |
चांदनी
हूँ मै चाँद की खोज
मे
निर्मोही कहाँ चला गया इस रात मे
दिल न लगता तुम बिन
मेरा
इस शुहानी
रात मे |
बोल पड़ा चाँद
बदलो की आड़ मे
सरम
से परेशान हूँ मै
तेरी सुन्दरता सा जैसा सुन्दर न हूँ मै
सामने
कैसे आऊ बहुत मजबूर हूँ मै|
हस पड़ी चांदनी
तारो की बरात मै
बावले चाँद मेरी सुन्दरता
तेरे से ही है
न तडफा
तू मुझे इस शुनहरी रात मे
खुस होकर चाँद पास आया उसके
तारो की बरात मे |
डा० नरेश
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