“ मेरा गम “
मुहब्बत इजहार न किया तुने कभी
जीते जी तडफा दिया मुझे
सह न पाया गम तेरा
मै
दुनिया को अलबिदा कह दिया|इजहार
न|
चाह मेरी दिल मे थी
बरात
तेरे घर लाने
की
कबूल न
मुहब्बत का किया तुने
मुझे जिन्दगी पुरी तडफा दिया | चाह मेरी |
इंतजार
मै मै तेरी
मुहब्बत का
दीपक जलाता रहा
बुझा
दिया तुने मुहब्बत का दीपक
मुझे
कबर मे
पहुचा दिया | इंतजार करते |
न आना तू कबर पर मेरी
न जलाना गम
का दिया
न् पढना फातिया कभी
तू मजार
पर मेरी कभी |न अना ..|
नरेश
No comments:
Post a Comment