दुःख –काल “
अंधकार देश मे छाया
है
बदरा काला
काला है
ठंड भी
योमन मे है
महिलाओ मे गुशा आया है |
विरोध सी oएo ए o का छाया है
तोडा –फोडी का वातावरण छाया है
दुर्गा का खप्पर
दिल्ली मे आया है
जब्बर जस्ट नारी - सुनामी आया है |
विधार्थी समूह पर अत्याचार होता है
गोली बरसाई जाती सर फोड़ा जाता है
पुलीस सुप्ता मे लगती है
अपना कर्तब्य अपना
न करती है
पन्ना ...२ ....
“२”
आम आदमी भूखा प्यासा है
किसान भी
बहुत निराशा है
कश्मीर
मे महातम छाया है
३७० और ३५
का गम है |
सरहद
पर सफेद चादर
छाई है
गोला
- बरुद की वर्षा होती है
नित्य सैनिक शहीद
होते है
मुख्य मुद्दा देश का दफनाया जाता है |
डॉ. नरेश फौजी
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