"दिल "
दिल तुम्हारा वाह वाह
छा गया
मन मे
याद आती रोज तुम्हारी
दिल है
तुम्हारी खोज मे |
यहाँ देखा वहाँ देखा नजर न आया
ढूंढ़ता ढूंढ़ता थक गया
थक कर बैठ गया
यादो मे तेरी खो
गया |
तड़फना अच्छी
बात न होती
रुलाना भी बहुत गलत है
दिल लगाकर रूठ जाना
मुहब्बत का न वसूल है |
इश्क गजब की चीज है
लुफ़्तो से होती बनी
हीर राँझा आखरी सांस तक
इश्क करते
करते चले गए |
डॉ. नरेश
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