“ नजर “
नजर नही आता है
वह है आदर्स
डुंडा हर गलीयो कुचो मे
नजर नही आया वह आज तक | नजर नही ...|
क्यों
वह नजर नही आता
क्या नराज होकर चला गया कही
हर पल हर जगह है वह
नजर आता क्यों नही जन को |क्यों नजर ...|
आकास वाणी से
आवाज़ आयी
उसकी सोच का दुश्मन
बन गया है शक्तीशाली
नफरत की राग
गाता है |नफरत की ...|
राजा हरीश्चन्द्र ने सच अपनाया
रंक बन गया
था वह
मरघट पर चाकरी किया
आज भी हर दिल मे बसा है वह |राजा हरीश्चन्द्र ...|
सच
बलवान होता है
वह अम्रर
होता है
झूठा चंद दिनों का होता है
फेक्ता
फेक्ता खुद खत्म हो जाता है | सच बलवान ...|
झूठा मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखता
है
बहन भाईओ कह
कर लुभाता है
उत्पात
और हिंसा का जमावड़ा लगाता है
नफरत की आग चारो कोने लगाता है |झूठा मुंगरी .....|
डॉ. नरेश फौजी
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