Tuesday, 15 May 2018

शुभ सादी के पल



                             


   " शुभ शादी का  पल" १५ मई,१९७३
( श्रीमती सरला गौतम )
वि० डी०ओ० बरेली
आज बंधन बन्धी बाबुल का घर छोड़ा था
परिवार खुसी से रो रहा था
विदाई की संगीत कानो मे बसा था
तुम्हारा मन पती से मिलने का डोला था |


चांदनी आयी थी अपने चाँद के संग
शहैलीओ की टोली थी अपने चाँद के संग
तुम्हारा पती चमकता था तुम्हारे संग
आरती उतारी जा रही थी तुम्हारे पती के संग |


तुम प्रशन्न थी इतनी जिसकी थाह न थी
झूम रही थी तुम अपने मन ही मन
आशुं माँ का गीर रहा था झरने की तरह
गा रही थी तुम छोड़ बाबुल का घर पिया का घर जाना पड़ा|


कवि और तुम्हारी दीदी का खुसी से दिल बोलता है
मुबारक वाद मुबारक वाद आज के देवानो को
मांगता प्रभु से तुम्हारी खुश याली भरा जीवन
चलता रहे सदा खुसीमय तुम दोनों का जीवन |


               डॉ नरेश   एम ० एस ० लाल  )




  

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