"धित्कार"
धित्कार हो तुम्हे गडे मुर्दे खोदते
आलोचनाओ के जाल मे उलझे रहतो
हो
देश कल्याण न कुछ करते हो
बनारस की घटना असफलता की
निशानी है |
कानून व्यवस्था माँ से अल्लहा है
कोने कोने बलात्कार की घटना छाई है
माता बहने और बैटीया सुराछित नही है
कड़ी सुरछा की डपली बजते हो |
परेशानीयों से थक कर किसान आत्म
हत्या करते है
जवानों की पत्निया नित्य विधवा होती है
देश की
व्यवस्था बहुत सोचनीय हो चुकी है
बेकारी ,भुखमरी , महगाई आसमान छु चुकी है |
घपले का शिलशिला न ख़त्म हुवा
काले धन लाना असफल हुवा
कई बैंक मे गडबड झाला हुवा
देश भक्ती का कोई इजाफा न हुवा |
डॉ. नरेश (ऐम०ऐस० लाल )
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