“ ओखी “
ओखी
आई
ओखी आई
हम सब को कुछ बतलाने आई
अत्याचार हो रहा बेशुमार
स्वार्थमय हो
गया संसार | ओखी आयी ...|
गुंडा गर्दी सब ओर छाई
सज्जन गण की होती धुलाई
बलतकरीओ को मस्ती छायी
सुरछा
व्यवस्था सो गई भाई | गुंडा गर्दी
..|
अन्याय भारत मे छायी
धर्म
कर्म पर हो रही
लड़ाई
इंसानियत
खत्म होने की बारी आयी
नेता-गण खाते दूध मलाई
|अन्याय भारत ...|
अलोचना की राजनेतिक भारत मे छाया
अच्छा दिन और काला धन
न देश मे आया
जूमला बाजी
के द्वारा
शासन पाया
तनिक भी उनको न सरम आया| आलोचना की..|
धितकार है को
उन जनको
इंसानियत नही है उस जनको
गन्दे ढंग से जो
ठगते हम सबको
नित्य सताते
जो हम सबको | धित्कार है ..|
ओखी कहती
सुधर जाओ जल्दी
भाई-चारा जग मे बढाओ
जुमलेबाजी जुबा
पर न लाओ
गौ-माता
को न राजनेतिक- मुद्दा बनाओ | अखी कहती
..|
ऐम० ऐस० लाल उफर् नरेश
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