Friday, 1 December 2017

मेरा मन



                            मेरा - मन
तेरी सरकार से मेरी कबर भली है
यहाँ       न       तू है न नोटबंदी है |

विदेशो         मे    घूमता     है
बातो      मे         चतुर        है
आम      आदमी परेशान   है
       मुखिया  को फिकर है |

वादों      का     पक्का है
       सच्चा   इन्शान है
किसान     खुद्कुसी करते है
सीमा     पर जवान परेशान है |

कश्मीर आग की लपटों मे है
माँ  बहने    सुरछित नही है
खाने     पीने पे प्रतीबंद   है
ये    गजब    की   लहर है |


कुदरत कहती अन्याय    छाया  है
पाप      अधीक  चारो और छाया   है
दुर्घटना- रेल    देश मे    आया है
मौत का तूफान गोरखपूर मे आया है |
       नरेश (ऐम०ऐस लाल )

No comments:

Post a Comment