मेरा - मन
तेरी सरकार से
मेरी कबर भली है
यहाँ न तू है न नोटबंदी है |
विदेशो मे घूमता है
बातो मे चतुर है
आम आदमी परेशान
है
न मुखिया को फिकर है |
वादों का न पक्का है
न सच्चा इन्शान है
किसान खुद्कुसी करते है
सीमा पर
जवान परेशान है |
कश्मीर आग की लपटों मे है
माँ बहने सुरछित नही है
खाने पीने पे प्रतीबंद है
ये गजब की लहर है |
कुदरत कहती अन्याय छाया है
पाप अधीक चारो और छाया है
दुर्घटना- रेल देश मे आया है
मौत का तूफान
गोरखपूर मे आया है |
नरेश (ऐम०ऐस लाल )
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