“ इश्क “
दिल एक से लगाया था
न जाने कहाँ से दुसरी आ टपकी
अकेला रास्ते पर चल रहा था
न जाने कहाँ से
तीसरी आ टपकी |दिल उससे ...|
कयामत
छप्पड फाड़ कर देती है
याद आया मुझे दादू की बात
खुदा
देता है छप्पड़ फाडकर
जब सितारे बुलंद होते है जनाब
|कयामत छप्पड़ ....|
इश्क
गजब की चीज है
समझना है बहुत मुश्किल
इश्क हो जाय अगर गद्दी से
छुडाना
होता है बहुत मुश्किल |इश्क गजब ...|
इश्क
दिवाना बना देती है
चाह वह परी या गद्दी हो
जिन्दगी गर्दिश के हवाले कर देती है
कबर मे सुला देती है |इश्क दिवाना..|
डॉ.
नरेश फौजी
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