"
नबी का नूर "
हर
जगह नबी का नूर
छाया है
इंशा
के रग रग
मे छाया है
रहमत
उसने ही बरसाया
है
हर
दिलो मे नबी
छाया है |
इसी
के मैहर से
चलती है दुनिया
दर्रे दर्रे
मे उसका नूर
है
शक हो
तुम्हे जरा भी
सर
झुका कर आजमा कर देख लो |
भाई
चारे से बनती
है दुनिया
खून
खराबी से उजड़ती है दुनिया
मुहब्बत से
बनती है दुनिया
यकीन
करके आजमा लो दुनिया
|
आरजू मेरी
बस इतनी
भाई -चारा दिल मे
बसा लो यारो
गल्ले
लगाकर होली दिवाली ईद मनाओ
हिंदुस्तान को जन्नत बना दो प्यारो |
naresh fauji
No comments:
Post a Comment