"
देश
के निर्लज "
नारी का सम्मान न करते है
नारा नारी -सम्मान का करते है
मूह से राम राम करते है
नारी आश्रम मौज करते है |
नबालीक न बुडिया इन्हे दिखती है
न गोरी न काली देखती है
अपंग विचारीया इन्हे न देखती है
योन की सारी मस्ती इन्हे दिखती है |
कानून का भय इनको न होता है
नेतागण के ये समूह तोता है
अनुदान इनको सरकार से मिलता है
बाल्य-
ग्रह अमानीय घटना करते है |
डॉ. एम ० एस ० लाल
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