“जीवन”
काटो पर चलने वाले हम है
फूलो की शुगन्ध न पाई है
फूलो से बेहतर काटा है
काटो के संग पल बिताई है | काटो पर..|
भूख न सता
पाती है
दुःख गया बन यार मेरा है
जन-पथ पर
जीवन गुजरता है
मस्ती जीवन मे छायी
है भूख न ..|
रंग रलिया मनाने का एक पल नही है
रूठना न मुझको
आता न कभी है
बस चाह
बस इतनी है
काटो से बस आंख
मिलाई है | रंग रलिया ...|
दिया बुझने वाला मेरा है
तेल न है रती
भर न उसमे है
जन-पथ अब अच्छा
लगता है
बाकी दुःख की खाई है |दिया
भुझने वाला है ..|
ऐम० एस ० लाल वकील
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