“ कौन “
तू कौन हो बता ,
बसी है आँखों मेरी
निगाह जहाँ जाती
है
देखता हूँ तस्बीर तेरी |तू कौन .. ..|
आवाज़ देता तुझे मै बहुत
जबाब
क्यों न देती हो
पलक
बंद करता हूँ
देखता
तस्बीर तेरी |आवाज़ देता ..|
तमन्ना मिलने की है तुझसे
,
तेरा अशीयान्ना
न मलुम है
जाने क्यों याद आती हो तू
तू
बसी है दिल मेरी |तमन्ना मिलने ..|
तेरे बिना सब सुना सूना लगता है
न दिन न रात
अच्छी लगती है
न भूख
लगती है
नीद मुझ से दूर रहती है |तेरे बिना ...|
आरजू खुदा से है बस इतनी
सलामत रखये तुझे
तेरा नूर सलामत रखये
परिओ की रानी
बना रखये |आरजू खुदा .|
“ नरेश “
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