“अपना-भारत
“
यह देश अपना है यह देश अपना है
न इनका है न उनका है भारतवाशी का भारत है
देश
का ७० वा गण-तन्त्र दिवस शुभ है
दिल
से कहो भारतवरष देश
अपना है |यह देश .. |
गंगा मईया बहती भारत मे सबके लिये
है
पेड न खुद
फल खाता है
प्राकिर्ती सब के
लिये जीवीत है
कल्याण का पाठ्य पढाती है |गंगा
मईया ...|
संकुचीत भावना दिल
से हटाना है
स्वार्थ न दिल
मे कभी लाना है
बेकारी और आत्म हत्या देश से
भगाना है
जय
जवान और जय किसान का नारा लगाना है |
संकुचीत भावना.. |
मद्जीत
मन्दिर गुरद्वारा और गिरजा-घर चार धाम है
भाई-चारा और पवित्रता रखने का भारत मे
धाम है
नारी-सम्मान रखने
का
पवित्र स्थान है
सत्य मेव
जयतैय कहनेवाला
हमारा हिंदुस्तान है
|मदजीत
मन्दिर..|
प्रजातंत्र रखने का एक अनोखा हमारा संविधान है
न्याय- पलिका
का भारत मे
उच्च स्थान है
जवान और किसान भारत
के महान है
पर्वतों
से घिरा भारत दुनिया मे एक महान है|प्रजातंत्र रखने..|
७० वे गण-तन्त्र दिवस के अवशर पर कवि का निम्न संकल्प है
भ्रस्टाचार , अत्याचार, नारी-
अपराध न देश मे होने देना है
अपनापन हर जन जन के दिल मे
उपजाना है
जुमलेबाजी अब भारत-देश
मे न होने देना है |
७०
वे गणतन्त्र दिवस ....|
ऐम० एस ० लाल भू०पू० सैनिक
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