“ किश्ती “
मेरी किश्ती डूब रही है अरब सागर मे,
खुदा भेज दे
कोई मेरी जान बचा ले | मेरी किश्ती ..|
मेरी जान बहुत खतरे मे
पड़ी है
कोई आकर मेरी
जान बचा दे या
इतला कर
दे कोई मेरी परी को ,
मेरी किश्ती
डूब रही है | मेरी जान..|
सुनते ही ये खबर वह
आयेगी जरुर
बाजी पर रखकर जान अपनी मुझे बचायेगी जरुर |मेरी जान... ..|
फकर
है मुझे इस जिन्दगी मे अपनी परी पर
वह मेरी
जिन्दगी की नूर है
नूरी कहते
उसे सब लोग
पर वह
रहती है मुझ से
बहुत दूर |फकर है..|
बफ्हा का चोला
पहनकर उससे मुहब्बत किया मैने
न जाने
क्या खता हो गई जिन्दगी मे मेरी
वह रूठ कर
चली गई मेरी
जिन्दगी से बहुत दूर
उम्मीद मुझे है एक दिन वह आयेगी मेरी बाहों मे जरुर |बफा का|
ऐम० एस ० लाल (नरेश)
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