“ इश्कबाज “
इश्क करने वाले दिल से मुहब्बत करते
है ,
भूखे रह कर माशूक को काजू
बदाम खिलाते है |
फटा कुरता पहनकर माशूक को बनारस
की साडी से सजाते है
हर पल सर झुकाकर अपनी मोहब्बत
का इजहार किया करते है|
खुद मिट जाये फिर भी कोई शिकवा ,शिकायत नही करते है |
काटो पर चलते वह
अपनी परवा कभी न करते है ,
मेह्मुबा को
खुस करने के लिये हर कोशिस करते है
|
आग मे कूद कर लेल्ला की जान बचाते है ,
कुर्बान हो कर वह लेलला के मजनू
कहलाते है |
जब कोई नफरत
इस्कबाज से करता
है
मस्त होकर
मोहब्बत की कश्ती चलाते है |
तन्हाई का शैलाब जब उनके पास आता
है
तनहाई मे भी वह मुहब्बत की शहनाई बजाते है |
इश्कबाज जिन्दगी मे कभी
किसी से डरते
नही है
अपनी महबूबा
को खुदा मानकर अपनी जिन्दगी बिताते
है
ऐम० ऐस० लाल (नरेश)
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