" मेरा मन "
बोलता है मन मेरा
जाग जाओ
भारतीय
बिलम्ब न करो
अब
मेरे पूज्य
भारतीय |
गंगा - माई कह रही
न डालो कूड़ा हे जन मेरे अंग मे
गंद नहीं
अब शहन न होता
कदर करो
मेरा |
भूल गये सदाचार सारे
भूल
गये हो तुम सभ्यता
याद
करो माँ
का कर्ज
धरा पर लाया है
तुम्हे |
नशा
अच्छा है नहीं जान लो
घपले घपले क़र के
तुम
आलोचना
द्वारा ढकते अपराध तुम
सम्मान पाते
हो तुम
पुषोतम राम के मार्ग पर न चलते
राम
पर राज्य नैतिक करते हो तुम
स्वच्छ क़र लो दिल
अपना
स्वंभ राम राज्य
आ जायगा |
लोभ मोह
नास करता इन्शानियत
भाई-चारा का अंत
से अंधकार हो जायेगा
प्रजातंत्र के
मिटने पर
हिंदुस्तान ख़त्म
हो जायेगा |
योजनाओ
कल्याणकरी बनाओ
न हो मुंगेरी लाल का सप्ना
न डुबो घमंड मे
तुम
अपना खो जायेगा |
डॉ नरेश एडवोकट /भू ० पूरब ० सैनिक
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