Monday, 25 June 2018

वर्षा रानी



           " वर्षा रानी "
तेरा पग मुम्बई मे पधारे
ताप मान गिर गये विचारे
शीतलता मन मे आयी हमारे
तारो ने कहा बाय बाय प्यारे |
रेल की पहिया रुक गयी सारी
यात्रा बन गयी कष्ट की क्यारी
तलाब बन गया दादर सारा
बी ० एम ० सी० की खुल गया पोल सारा |
सडक के गड्ढे गहरे हो गया सारा
अकेला आयुक्त क्या करे बिचारा
ठेके दार खा गया साफ़ सफाई का फण्ड सारा
बी० ऐम० सी ० का है हर साल काम निराला |
मढगाँव की फेरी- रोड है अधूरी
पी नार्थ वार्ड की है बड़ी कमजोरी
सूचक सोसाइटी ने जरुर नोटिस पाया
अभी तक न बदला मढ़ की काया |
पी०नार्थ वार्ड है सोने की है खान
दलालों और प्रभावी शाली की है जान
मिलकर सब खाते है बंगला पान
आम आदमी मढ गाँव का है परेशान |
ऐम० एस लाल भू० पूरब सैनिक

No comments:

Post a Comment