" वर्षा रानी "
तेरा पग
मुम्बई मे पधारे
ताप मान गिर
गये विचारे
शीतलता मन मे
आयी हमारे
तारो ने कहा बाय
बाय प्यारे |
रेल की पहिया
रुक गयी सारी
यात्रा बन गयी
कष्ट की क्यारी
तलाब बन गया दादर
सारा
बी ० एम ० सी०
की खुल गया पोल सारा |
सडक के गड्ढे गहरे हो गया सारा
अकेला आयुक्त क्या करे बिचारा
ठेके दार खा गया साफ़
सफाई का फण्ड सारा
बी० ऐम० सी ० का है हर साल
काम निराला |
मढगाँव की फेरी- रोड है अधूरी
पी नार्थ
वार्ड की है बड़ी कमजोरी
सूचक सोसाइटी
ने जरुर नोटिस पाया
अभी तक न बदला मढ़ की काया |
पी०नार्थ वार्ड है सोने की है
खान
दलालों और
प्रभावी शाली की है जान
मिलकर सब खाते है बंगला पान
आम आदमी मढ गाँव का है परेशान |
ऐम० एस लाल
भू० पूरब सैनिक
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