“
मुहब्बत “
तोड़ दो नफरत की जंजीर
दिल मे मुहब्बत भर
लो
वतन तुम्हारा
भारत है
इससे
जरा मुहब्बत तुम कर लो | तोड़ दो
..|
धर्म के ठेकेदारो ने हमे
बाटा कितनी सदीयों पहले
जब न
कनून था न कचहरी थी दुनिया मे
चंद लोग धनी
हमको उल्लू बनाकर अपनी जीवका कमाते थे
हम सब को गुलाम बनाकर रखते थे|धर्म के ..|
विज्ञानं चारो तरफ योमन मे है
प्रजातंत्र की हवा भारत मे आयी है
कुर्बानी योद्धाओ ने करके आजादी भारत मे लायी है
इससे
जरा तुम मुह्ब्त दिल से कर लो |विज्ञानं
चारो ..|
न तुम हिन्दू हो न मुस्लीम न
सीक इसाईं हो
तुम
भारत माता के बच्चे हो
भारतीय
सारा हिन्दुस्तानी है
मुहब्बत
से भारत माता की गोद मे खुस होकर जी लो|न तुम..|
पन्ना ..२..
“२”
हमारा धर्म इन्शानियत मे है
हमारा वेद पुराण इंसानियत मे है
हमारा
कुरान इन्शानियत मे है
राम
,रहीम ,गुरु नानक, ईसू इन्शानियत मे बसते है
|हमारा धर्म..|
हमे न मन्दिर न मजीत,न गुरुद्वारा
,न गिरजाघर चाहिए
केवल
हिन्दुस्तानीओ के मन मे मुहब्बत
चाहिए
भूल
जाओ उन ठेकेदारो को हमे भाई- चारा चाहिए
हिन्दुस्तनीओ
को केवल जीने का हक चाहिए |हमे न.. .|
हमे उपर वाले ने जीवन
चंद लमहों तक दिया है
दुबारा
किसी को न मिलनेवाला है
जरा इन्शानियत
को अपनाकर
खुसीओ से हिन्दुस्तानी
जरा जी लो |हमे उपर...|
धनी वर्ग कभी राजा कभी राज्य नेता बनकर होसियार बनते है
मानव
–
कल सबकी है एक जैसी
क्यों धनी
वर्ग दुसरो से ओवर स्मार्ट बनकर
हिन्दुस्तानीओ पर स्वर्थी राज्य करते है| धनी वर्ग..|
पन्ना..३..
“३”
तोड़ दो सारा बंधन स्वर्थीओ वर्गो का
इन्शानियत हिन्दुस्तानीओ के मन मे लाना है
मुहब्बत
से मिलकर हिन्दुस्तनीओ
इन्शानियत
का दीपक जलाना है |
ऐम० ऐस० लाल भू०
पूरब सैनिक
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