“ अद्दा “
तुम्हारी चुलबुली सारी हरकत तुम्हारी याद दिलाती है
पलक झपकते
ही तुम मेरी आँखों मे छा जाती हो
कभी झप्पी पाती
हो कभी मुहब्बत की राग सुनाती हो
तुम अपनी नटखट
अद्दाओ से मुझे रिझाती हो | तुम्हारी चुलबुली...|
तुम्हारे ओठो की
लाली गुलाब से बेहतर है
तुम्हारी मस्तानी आंखे मोहब्बत का इजहार करती है
पास आते ही तुम्हारे जिन्दगी जन्नत
बन जाती है
मोहनी सुरत तुम्हारी
मुझे खूब लुभाती है |तुम्हारे ओठो
...|
आंख मेरी खुलते ही
तुम भाग जाती हो
आवाज़ बहुत देता
हूँ तुझे न तुम आती हो
खोजता गल्ली कुचो मे कहीं तुम खो जाती हो
मजनू मै बन जाता हूँ मेरी तुम लैला बन जाती हो| आंख मेरी ..|
मुहब्बत
करना सब से खुदा का आदेश
है
इंसानियत
बरकरार रखना खुदा का भी आदेश है
अहिंसा परमो धर्माँ बापू का ही
उपदेश है
मुहब्बत मे मिट
जाना मुहब्बत का आशुल है |मुहब्बत करना .. |
ऐम० ऐस० लाल वकील
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