मान्यवर अशोक शर्मा साहिब,
आदाब
और शुक्रिया ,
" मेरे हजूर "
मै
खोजता हूँ अपनो को
अपने
सब भूल गये मुझको ,
नदी
किनारे खड़ा हूँ आश मे
कभी
अपने मेरे पास आयेगे |
आप याद आते है अक्सर
बात कर लेता हूँ खुब
मुसकराते है आप खुब
रेकी उतम साधन है मेरा |
हमारा भारत देश महान है
दुनीया सलाम और वाह वाह करती है
दुख बस है इतना कवी को देश के चालक
अब वे विकास कमऔर क ख गचुनाव मे पढते है |
भारत अब भी सोने की चिडीया है
यहाँ लछमन बूटी हिमालय मे है
सोमलता अस्थमा ख़त्म करने की दवा है
दुख इतना है सरकार का ध्यान तनिक न
है |
मेरे हजूर चर्चा बहुत करना है
देश के विकास की फ़िक्रर सच्च्ऐ दिल से नही है
विकास के गीत गा गा कर वे शान पा जाते
है
दुखी हूँ शहिद सीमा पर होरहे
किसान खेतो मे मरते है |
ऐम० एस ० लाल उफर "नरेश "
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