"
हमारा भारत "
जब आंख खुलती है प्रातः
देश की हालात ख़राब सताती
है
आँखों मे आँशु का
सागर बन जाता है
पुजय
राष्टय पिता की याद आती है |
देश की आजादी दिलाने वालो की याद
आती है
सब सुख त्याग कर बलिदान हो गये
कुर्बानी
उनकी बहुत याद आती है
सारे भारतीय उन सहीदो के आभारी है |
लाज न आती राजय नेताओ को
अपनी ढपली बजाते है
आलोचनाओं के सागर
मे गोता लगते है
मुंगेरी लाल के हशीन दिखा कर
जनता को लुभाते है |
महगाई आकाश
को छूती है
नौकरीया चली गयी जहानम
किसान आतम हत्या
करते रोज
सैनिक नित्य
शहीद होते है |
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नाम बदलने की बयार
देश मे
आयी है
मुर्तिओ पर देश का धन
नेता बिंदास फेकते है
घटबन्धन का तूफान देश मे आया है
स्वार्थ नेताओ
के दिल मे छाया है |
सविधान गिरने की कगार पर है
गरीबो का धंधा
ख़तम हो गया है
भरस्टचार
देश मे छाया है
मन मे स्वार्थ छाया है |
डॉ. एम० ऐस ०
लाल भू ०
पू o सैनिक
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