" नबी का नूर "
हर
जगह नबी का नूर
छाया है
इंशा
के रग रग
मे छाया है
रहमत
उसने ही
बरसाया है
हर
दिलो मे नबी
छाया है |
इसी
के मैहर से
चलती है दुनिया
दर्रे
दर्रे मे
उसका नूर है
शक हो
तुम्हे
जरा भी
सर
झुका कर आजमा कर देख लो |
भाई
चारे से
बनती है दुनिया
खून
खराबी से उजड़ती
है दुनिया
मुहब्बत से बनती
है दुनिया
यकीन करके
आजमा लो दुनिया |
आरजू मेरी
बस
इतनी
भाई -चारा दिल मे
बसा लो यारो
गल्ले लगाकर
होली दिवाली ईद मनाओ
हिंदुस्तान को जन्नत
बना दो प्यारो |
डॉ.
एम० ऐस ० लाल
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