“ गाय एक पशु “
सिम्ट जायेगी तेरी चाल एक दिन
न तेरा शासन
होगा न बता पायेगा अपना मन .
उचित कहा
है किसी
शायर ने
कुते का भी होता है
अपना एक दिन |
जिसका तुम
चरर्बी दूध के रूप मे पीते हो
उसे तुम
माता चिला चिला कर कहते हो
न अक्ल है
न
लाज है तुम सब को विज्ञानं युग मे
अपनी माता का ही खून दूध दही घी मखन के रूप
मे खाते हो |
माना गाय
माता
आप सब की है
ये भी सच्च
बात है कि गाय बहुत उपयोगी है
बैल अन्न उगाने मे सहायक होता है उसको बाप क्यों न कहते हो
भेस बकरी अन्य
पसुओ का जीवन क्यों नही बचाते हो
|
पशुओ का
मांस विदेशो मे बेचकर
खूब धन आता
देश
की अर्थ व्यवस्था मे बहुत सहायक
होता है
गाय
मांस का धन्धा बंद करके दलित और बुचरों को रुलाते हो
देश मे
हाहाकार और बेकारी का पहाड़
बनाते हो |
डॉ. ऐम०एस लाल
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