मेरे आंशु
निकल जाते है आँखों से आँशु
मेरी आखे गँगा बन जाती
ख्याल मेर्र दिल के टुकडे का आता जब
दिल मे बेठ रोज़ सताता मुझे |
लगता मेरा सनी पुत्र घर वापस आया है
पल भर मे वह आँखों से ओझल हो जाता है
दर्द का भंडार मन मेरा बन जाता है
एक पल भी काटना मुश्किल हो जाता है |
लुन्झ पुन्झ कर देता मुझको
गम का बादल क्यों मेरे चारो तरफ छा जाता है
लबा लब भर जाता है गँगा जल आँखों मे मेरी
गमो का सागर मेरा दिल बन जाता है
नरेश
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